कृषि विज्ञान केंद्र की किसानों को पाला से फसलों के बचाव हेतु सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र की किसानों को पाला से फसलों के बचाव हेतु सलाह
वर्तमान में विगत दो-तीन दिनों से जिले में लगातार उत्तर एवं पश्चिम से ठंडी हवाएं एवमं बर्फबारी चलते तापमान में गिरावट होने के कारण फसलों एवं उद्यानिकी फसलों पर पाला पड़ने की संभावना बढ़ गई है। जिसे आगे 2 दिनों तक बने रहने की संभावना है।
पाला मुख्यतः दो तरह का होता है पहला समानान्तर पाला एवं दूसरा विकिरण द्वारा पाला। शीतलहर में ठंडी हवाएं चलने के कारण तथा विकिरण पाला तब पड़ता है जब हवा शांत हो तथा आसमान बिल्कुल साफ हो उस दिन पाला पड़ने की संभावना रहती है।पाला तब पड़ता है जब तापमान 4 डिग्री सेंटीग्रेड से कम होते हुए शून्य डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है तब पाला पड़ता है । ऐसी अवस्था में वायुमंडल के तापमान को शून्य डिग्री से ऊपर बनाए रखना जरूरी हो जाता है। पाले की अवस्था में पौधों के अंदर का पानी जम जाने से तथा उसका आयतन बढ़ने से पौधों की कोशिकाएं फट जाती है जिसके कारण पत्तियां झुलस जाती हैं और प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होने से फसल में फल और फूल नहीं लगते तथा उपज बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त तापमान कई बार शून्य डिग्री सेल्सियस या इससे भी कम हो जाता है तो ऐसी अवस्था में ओस की बूंदे पौधों पर जम जाती हैं जिसके कारण पौधों तथा उनकी फलियों और फूलों और पत्तो पर बर्फ जमा होने से ज्यादा नुकसान होता है। यदि पाला की यह अवस्था अधिक देर तक बनी रहे तो पौधे मर भी सकते हैं।
पाला विशेषकर दिसंबर तथा जनवरी के महीने में ज्यादा पड़ने की संभावना रहती है। पाला के प्रभाव से प्रमुख रूप से उद्यानिकी फसलें जैसे टमाटर, बैंगन , आलू, फूलगोभी, मिर्च धनिया, पालक तथा फसलों में प्रमुख रूप से मसूर चना तथा कुछ मात्रा में गेहूं आदि के प्रभावित होने की ज्यादा संभावना रहती है विशेषकर जब यह फूल और फल की अवस्था में हो।अतः पाले से बचाव के लिए यहां किसान भाइयों को कुछ विशेष उपयोगी सलाह दिए जाते हैं जिससे कि समय रहते इसे अपनाकर काफी हद तक अपनी फसलों को बचा सके ।
पाला से फसलों का बचावः-
1. पाला पड़ने की संभावना होने पर किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वह रात्रि 10 बजे से पहले दिन में सिंचाई अवश्य करें ।फसलों में सिंचाई रात्रि के दूसरे तथा तीसरे प्रहर में नहीं करना चाहिए।
2.पाला की आशंका होने पर फसलों तथा उद्यान की फसलों में घुलनशील गंधक 80 प्रतिषत डब्ल्यू पी का दो से ढाई ग्राम मात्रा को प्रति लीटर की दर से पानी में घोल बनाकर डेढ़ सौ से दो सौ लीटर पानी में घोलकर फसलों के ऊपर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। इससे दो से ढाई डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान बढ़ने से काफी हद तक पाला से बचाया जा सकता है।
3. बारानी फसलों में पाले की आशंका होने पर व्यावसायिक गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिषत के घोल का अर्थात 1 मिलीलीटर दवा को प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसलों के ऊपर छिड़काव करना चाहिए परंतु ध्यान रखें की इसकी संतुलित और निश्चित मात्रा का ही प्रयोग करें अन्यथा फसल को नुकसान हो सकता है । इसी प्रकार इसके स्थान पर थायोयूरिया का 0.5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोल की दर से छिड़काव करने से भी पाला से काफी हद तक फसलो को बचाया जा सकता है। प्रत्येक अवस्था में पानी की मात्रा प्रति एकड़ डेढ़ सौ से दो सौ लीटर अवश्य रखें।
4.पाला से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है । इसलिए रात्रि के समय नर्सरी में लगे पौधों को प्लास्टिक की चादर से ढक करके बचाया जा सकता है। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है जिसके कारण तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंचता है और पौधे पाला से बच जाते हैं । लेकिन यह तकनीकी कम क्षेत्र के लिए उपयोगी है । जिन किसान भाइयों ने 1 वर्ष से 2 वर्ष के फलदार पौधों का अपने खेतों में वृक्षारोपण किया हो उन्हें बचाने के लिए पुआल, घास फूस आदि से अथवा प्लास्टिक की सहायता से ढककर बचाना चाहिए । प्लास्टिक की सहायता से क्लोच अथवा टाटिया बनाकर पौधों को ढक देने से भी पाला से रक्षा होती है। इसके अलावा थालों के चारों ओर मल्चिंग करके सिंचाई करते रहना चाहिए ।
5.दिसंबर से फरवरी माह तक अधिक ठंड पड़ने के कारण पशु तथा बछड़ों आदि को भी रात्रि के समय घरों के अंदर बांधना चाहिए तथा उन्हें बोरे तथा जूट के बोरे तथा टाट पट्टी से ओढ़ाकर ठंठ से बचाना चाहिए। इसी प्रकार मुर्गी तथा बकरी घर को भी चारों तरफ से पॉलिथीन की सीट या टाट पट्टी आदि बांधकर ठंडी हवाओं से चारों तरफ से बचाना चाहिए।
6.छोटे किसान भाई जहां पर खेतों का क्षेत्रफल कम हो वहाँ मध्यरात्रि के बाद मेड़ो के ऊपर उत्तर तथा पश्चिम की तरफ घास फूस आदि में थोड़ा नमी बनाकर जलाकर धुआ करें हालांकि यह प्रक्रिया पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं है पर इससे भी पाला से बचाव में सहायता मिलती है।
7.ज्यादा ठंड तथा पाला पड़ने पर मनुष्यों एवं बच्चों को भी सलाह दी जाती है कि वह रात्रि के तीसरे और चौथे प्रहर में खेतों की मेड़ों पर या यहाँ वहाँ न घूमे। तथा गर्म कपड़े आदि पहन कर घर मे ही रहे एवं सूर्योदय के बाद ही घर से निकलने की सलाह दी जाती है।
REPORT : AMAN SETH REHLI CITY

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